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Short Motivational Story in Hindi for Success
दोस्तों बात 2005 की है मेरा इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला हुआ था। मैं बहुत से सपने लेकर की डिग्री कॉलेज गया था, क्योंकि आपके माता-पिता आपको बचपन से सिखाते हैं, कि आपको बड़े होकर या तो डॉक्टर बनना है इंजीनियर। मैं काफी खुश था। बहुत मुश्किल से मेरा दाखिला एक बड़े कॉलेज में हुआ था। मेरा पहला दिन था, मैं वहां पर गया तभी मैंने देखा कि नए फ्रेशर स्टूडेंट्स के 1 लाइन लगी हुई है और कुछ लोग एक कमरे में सारे स्टूडेंट्स को बुला करके उनकी रैगिंग ले रहे हैं। वह हमारे सीनियर थे।
हम सेमेस्टर वन के थे और वह सेमेस्टर 8 के, वह हम लोगों से काफी कुछ करवा रहे थे। मेरे घुसते ही सीनियर की बैच में से, एक लड़के ने बोला ” तुम्हारा नाम क्या है?” मैंने बताया” सर अभिनव।” तुरंत जवाब दिया वह फ्रेशर्स और सारे लोग हंसाने लगे उनमें से एक सीनियर था, जो कि काफी शांत था। और वह दिखने से ही होनहार नजर आ रहा था। बाद में पता चला कि वह हमारे कॉलेज का टॉपर है, तो जब सारे लोगों ने मुझसे कहा ” कुछ गाना वाना आता है तो सुनाओ”? मुझे बहुत झिझक महसूस हो रही थी। कि वह सीनियर है, और काफी बहुत सारे बच्चे थे। जो कि फ्रेशर्स थे और डरे हुए भी थे।

मैं काफी शर्मिला था। तो मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था। इतनी भीड़ में गाना गाने से। उसके बाद मैं देखा और कहा” सर सॉरी मैं नहीं गा सकता मुझे झिझक होती है।” 2 लोगों ने बहुत इंसिस्ट किया। वह सर ने मेरी मदद की और कहा” छोड़ दो” उस दिन मैंने रीलाइज किया बाकी दुनिया में कुछ अच्छे लोग भी है। उसके बाद सीनियर क्लास से निकल गए। और वह सीनियर जिसने मेरी हेल्प की थी वह सबसे लास्ट में गए।
Real life inspirational short stories in hindi
अगले दिन क्लास जाते वक्त उनके पीछे पीछे जाते हुए कहा “गुड मॉर्निंग सर थैंक्स, कल मेरी मदद करने के लिए “तो उन्होंने कहा “कोई बात नहीं।” धीरे धीरे मेरी उनसे ज्यादा बात होने लगी। क्योंकि मेरे दिल में उनके लिए एक अच्छी जगह बन चुकी थी। उनका नाम राजेश था वह लास्ट ईयर में थे। और उनके सेशन खत्म होने में मात्र 6 महीने बाकी था। और 6 महीने बाद वैसे भी हम लोगों पूरे दोस्त बन चुके थे।
उनके साथ रहकर काम करते हुए मैंने जाना कि वे काम बहुत अच्छे तरीके से करते थे, लेकिन वह कभी भी समय से ज्यादा नहीं करते थे। घंटी लगने के बाद एक मिनट भी नहीं रुकते थे। धीरे-धीरे समय बदला फिर सर का फेयर वेल हो गया। उनकी भी जॉब लग गई उनकी जॉब एक बहुत ही रिपिटेटिव यानी कि टीसीएस में लगी थी।
सब कोई बहुत खुश थे, उन्होंने ज्वाइन किया उसके बाद धीरे-धीरे साल बीतते गए। फिर मैंने 2009 में अपनी इंजीनियरिंग कंप्लीट कि, उसके बाद मेरा प्लेसमेंट पुणे की एक कंपनी में हो गया। वहां पर कुछ दिन काम किया और मेरे एक्सीलेंट वर्क के कारण मुझे फिर टीसीएस में ट्रांसफर कर दिया गया। और टीसीएस के जमशेदपुर ब्रांच में हुआ।
आज फिर टीसीएस में जॉब का पहला दिन था। मुझे एक कैबिन मिला था मैं वहां का मैनेजर में से एक था। पियोन को बुलाकर कुछ जरूरी फाइलें लेने को कहा। उन्होंने कहा “हां सर मैं उसे भेजता हूं”। तो उसी समय मेरे को किसी ने नोक किया और “मे आई कम इन सर ? “मैंने कहा” कम इन”। तभी मैंने देखा कि वह राजेश सर है, और वह अभी मेरे से जूनियर हैं। 9 साल बाद भी।
उन्होंने इस कंपनी में मुझसे कई साल पहले शुरू किया था। मैंने कहा “सर कैसे हैं?” तो उन्होंने कहा “अरे अभिनव तू “। मैं काफी नर्वस था, कि वह मेरे साथ है वह भले ही जूनियर थे। पर मैं उन्हें सर कहकर पुकारा करता था। मैंने देखा कि उन्होंने जिस पोस्ट पर ज्वाइन किया था उसी पोस्ट में अभी भी थे। मुझे सोच कर बहुत आश्चर्य हुआ कि जो आदमी 12 साल से यहां पर जॉब कर रहा है वह अभी भी बिना प्रमोशन के कैसे हैं।
मैंने सर से पूछा “सर काम कैसा चल रहा हैं” तो उन्होंने जवाब दिया। “अभिनव काम तो बहुत अच्छा चल रहा हैं और तुम तो मुझे पहले से जानते हो। मैं अपना काम कैसा करता हूँ। जितना सैलरी मिलता हैं उतना करता हूँ। समय से आता हूँ और समय से जाता हूँ। एक मिनट न ज्यादा करता हूँ और न एक मिनट कम। जितना पैसा मिलता हैं उतना ही मेहनत करता हूँ।”
फिर कुछ काम आने पर वे चले गए, लेकिन मैं उनके बारे में सोचता रहा। फिर मुझे उनकी ये बात याद आयी की “समय से आता हूँ और समय से जाता हूँ। एक मिनट न ज्यादा करता हूँ और न एक मिनट कम। जितना पैसा मिलता हैं उतना ही मेहनत करता हूँ। “तब मुझे लगा शायद यही वजह से उनका परमोशन नहीं हुवा।
दोस्तों इस घटना से मुझे एक बात तो जरूर सिख मिली की लाइफ में सफलता पाने के लिए जितना ज्यादा हो सके मेहनत करे। ऐसा नहीं की आपको जितना मिल रहा हैं उतना ही मेहनत करे। इससे आप कभी आगे नहीं जा सकते हैं। आज अगर आप कम पैसा में भी ज्यादा मेहनत करेंगे तो ये मेहनत आगे जरूर ज्यादा पैसा देगी और सफल भी बनाएगी।
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